मिर्गी के दौरे आना (EPILEPSY)

3,499.0013,499.00

मिर्गी एक केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार है। इसमें मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिका (Nerve Cell) गतिविधि बाधित हो जाती है, जिसके कारण दौरे या कुछ समय तक असामान्य व्यवहार, उत्तेजना और कभी-कभी बेहोशी हो जाती है।

मिर्गी संक्रामक नहीं है और मानसिक बीमारी या मानसिक कमज़ोरी के कारण नहीं होती है। कभी-कभी गंभीर दौरे के कारण मस्तिष्क को क्षति हो सकती है, लेकिन अधिकांश दौरे मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव नहीं डालते हैं। बीमारी से होने वाली मस्तिष्क क्षति से लेकर असामान्य मस्तिष्क विकास तक मिर्गी के कई संभव कारण हैं। इसमें जेनेटिक्स भी एक भूमिका निभा सकता है।

Clear
SKU: N/A Category:

Description

मिर्गी क्या है?

मिर्गी एक केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार है। इसमें मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिका (Nerve Cell) गतिविधि बाधित हो जाती है, जिसके कारण दौरे या कुछ समय तक असामान्य व्यवहार, उत्तेजना और कभी-कभी बेहोशी हो जाती है।

मिर्गी संक्रामक नहीं है और मानसिक बीमारी या मानसिक कमज़ोरी के कारण नहीं होती है। कभी-कभी गंभीर दौरे के कारण मस्तिष्क को क्षति हो सकती है, लेकिन अधिकांश दौरे मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव नहीं डालते हैं। बीमारी से होने वाली मस्तिष्क क्षति से लेकर असामान्य मस्तिष्क विकास तक मिर्गी के कई संभव कारण हैं। इसमें जेनेटिक्स भी एक भूमिका निभा सकता है।

ब्रेन ट्यूमर, अधिक शराब पीने से होने वाली बीमारी, अल्जाइमर रोग, स्ट्रोक और दिल के दौरे सहित अन्य विकारों से मस्तिष्क को होने वाली क्षति के कारण भी मिर्गी विकसित हो सकती है। अन्य कारणों में सिर की चोट, जन्म के पूर्व (गर्भावस्था के दौरान) की चोट और विषाक्तता शामिल है।

मिर्गी के दौरे कई प्रकार के होते हैं, जिन्हें आंशिक दौरे, माध्यमिक दौरे और सामान्यीकृत दौरे (Generalized Seizures) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

एक हल्के दौरे को पहचानना मुश्किल हो सकता है। यह कुछ सेकंड के लिए रह सकता है, जिसके दौरान आपकी चेतना कम हो जाती है। तेज़ दौरे ऐंठन और मांसपेशियों में अनियंत्रित झटकों का कारण बन सकते हैं तथा यह कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकते हैं। एक तेज़ दौरे की अवधि में कुछ लोग भ्रमित हो जाते हैं या चेतना खो देते हैं। इसके बाद हो सकता है कि आपको इस दौरे के बारे में कुछ याद भी न रहे।

दौरों को बढ़ाने में कम सोना, शराब का सेवन, तनाव या मासिक धर्म चक्र से संबंधित हार्मोनल परिवर्तन शामिल है।

मिर्गी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन यह छोटे बच्चों और अधेड़ व्यक्तियों में अधिक आम है। यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक देखी जाती है। मिर्गी का इलाज करने के कई अलग-अलग तरीके हैं, जिनमें ध्यान (मेडिटेशन), मिर्गी का इलाज करने के लिए सर्जरी या मिर्गी की अंतर्निहित स्थितियों का उपचार, प्रत्यारोपित उपकरण और आहार शामिल है।

मिर्गी से पीड़ित ज्यादातर लोग पूरी तरह से सक्रिय जीवन जीते हैं। लेकिन उनके जीवन को खतरे में डालने वाली दो स्थितियों का उन्हें जोखिम है – स्टेटस एपिलेप्टिकस (जब एक व्यक्ति को असामान्य रूप से लंबे समय तक दौरा पड़ता है या दौरों के बीच पूरी तरह से चेतना नहीं रहती है) और अचानक होने वाली अस्पष्टीकृत मृत्यु।

मिर्गी का प्रसार- 

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि रोग के वैश्विक बोझ का 0.5% या 7 मिलियन के लिए मिर्गी जिम्मेदार है। सिर की चोट दुनिया भर में मिर्गी का एक सामान्य कारण है। भारत में प्रति हजार आबादी में लगभग 14 लोगों के मिर्गी से पीड़ित होने की संभावना है, जिसका बच्चों व युवा-वयस्कों और ग्रामीण क्षेत्रों में होने का उच्च अनुमान है।

मिर्गी के प्रकार – Types of Epilepsy in Hindi

दौरों के आधार पर मिर्गी के तीन प्रकार हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि मस्तिष्क के किस हिस्से पर मिर्गी की गतिविधि शुरू हुई –

1. आंशिक दौरा (Partial Seizure) एक आंशिक दौरे का अर्थ है कि रोगी के मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में मिर्गी की गतिविधि हुई थी। आंशिक दौरे के दो प्रकार होते हैं –

  • सरल आंशिक दौरा  इस दौरे की अवधि में रोगी जागरूक रहते हैं। ज्यादातर मामलों में रोगी अपने परिवेश से भी अवगत रहते हैं, भले ही दौरा बढ़ रहा हो।
  • जटिल आंशिक दौरा –  इसमें रोगी की चेतना ख़त्म हो जाती है। मरीज को आमतौर पर दौरे के बारे में याद नहीं रहता।

2. सामान्यीकृतदौरा (Generalized Seizure) –  एक सामान्यीकृत दौरा तब आता है, जब मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में मिर्गी संबंधी गतिविधि होती है। जब दौरा बढ़ जाता है, तो मरीज की चेतना ख़त्म हो जाती है।

  • टॉनिक-क्लोनिक दौरे–  ये सामान्यीकृत दौरे के शायद सबसे प्रसिद्ध प्रकार हैं। ये चेतना के लुप्त होने, शरीर के अकड़ने और कांपने का कारण बनते हैं।
  • एब्सेंस दौरे   इसमें चेतना थोड़े समय के लिए लुप्त हो जाती है और ऐसा लगता है, जैसे व्यक्ति अंतरिक्ष को घूर रहा हो।
  • टॉनिक दौरे  मांसपेशियाँ कठोर हो जाती हैं। इस दौरे में व्यक्ति नीचे गिर सकता है।
  • एटोनिक दौरे  मांसपेशियों पर नियंत्रण में कमी, जिसके कारण व्यक्ति अचानक गिर सकता है।
  • क्लोनिक दौरे – ये दौरे नियत अंतराल के बाद लगने वाले झटकों के साथ संबद्ध हैं।

3. माध्यमिक सामान्यीकृत दौरे (secondary generalised seizure) – एक माध्यमिक सामान्यीकृत दौरा तब पड़ता है, जब मिर्गी संबंधी गतिविधि आंशिक दौरे के रूप में शुरू होती है, लेकिन फिर मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में फैल जाती है। जब दौरा बढ़ जाता है, तो मरीज अपनी चेतना खो देता है।

मिर्गी के लक्षण – Epilepsy Symptoms

मिर्गी के मुख्य लक्षण दौरे पड़ना है। अलग-अलग व्यक्तियों में इसके लक्षण दौरों के प्रकार के अनुसार भिन्न होते हैं।

1. फोकल (आंशिक) दौरे – एक साधारण आंशिक दौरे में चेतना को कोई खास नुकसान नहीं होता। इसके लक्षणों में निम्न शामिल है –

  • स्वाद, गंध, दृष्टि, श्रवण या स्पर्श इन्द्रियों में बदलाव,
  • चक्कर आना,
  • अंगों में झनझनाहट महसूस होना इत्यादि।

2. जटिल आंशिक दौरे   इसमें जागरूकता या चेतना की क्षति शामिल है। अन्य लक्षणों में निम्न शामिल है –

  • एकतरफ नज़र टिकाये रखना,
  • कोई प्रतिक्रिया न करना,
  • एक ही गतिविधि को बार-बार दोहराना इत्यादि।

3. सामान्यीकृत दौरे – सामान्यीकृत दौरे में संपूर्ण मस्तिष्क शामिल होता है। इसके छह प्रकार हैं –

  • एब्सेंस दौरे (जिन्हें ‘पेटीट मल दौरे’ भी कहा जाता है) एकटक घूरते रहने का कारण बनते हैं। इस प्रकार के दौरे चटकारे लेना और आँखें झपकाने जैसी गतिविधियों को बार-बार दोहराने का कारण बन सकते हैं। आमतौर पर चेतना थोड़े समय के लिए लुप्त भी हो जाती है।
  • टोनिक दौरे मांसपेशियों में अकड़न पैदा करते हैं।
  • एटोनिक दौरे में मांसपेशियों पर नियंत्रण कम होता जाता है और व्यक्ति अचानक गिर सकता है।
  • क्लोनिक दौरों की पहचान चेहरे, गर्दन और बांह की मांसपेशियों में लगने वाले पुनरावृत्त झटकों से होती है।
  • मायोक्लोनिक दौरे के कारण हाथों और पैरों में स्वाभाविक रूप से तेज़ झनझनाहट होती है।
  • टॉनिक-क्लोनिक दौरों को ‘ग्रैंड मल दौरे’ कहा जाता था। इसके लक्षणों में शरीर में अकड़न, कम्पन या आंत्र नियंत्रण (Bowel Control) की हानि, जीभ को काटना, चेतना का लोप होना शामिल हैं।

दौरे के बाद आपको उसके बारे में याद नहीं रहता है या आप कुछ घंटों के लिए थोड़ा बीमार महसूस कर सकते हैं।

 

मिर्गी के कारण – Epilepsy Causes in Hindi

मिर्गी से पीड़ित लोगों में से लगभग आधे मरीज़ों में किसी विशेष कारण की पहचान नहीं होती है। अन्य व्यक्तियों में विभिन्न कारकों के द्वारा हालात का पता लगाया जा सकता  है –

  1. जेनेटिक  प्रभाव – पीढ़ियों से चलते आ रहे मिर्गी के कुछ प्रकार, महसूस किये गए दौरों या मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से द्वारा वर्गीकृत होते हैं। इन मामलों में संभावना है कि यह एक जेनेटिक प्रभाव होता है।
  2. सिर में चोट – एक कार दुर्घटना में या किसी अन्य घटना के कारण सिर में लगी चोट मिर्गी का कारण बन सकती है।
  3. मस्तिष्क की स्थिति – मस्तिष्क की स्थिति, जो उसे ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक के रूप में क्षति पहुंचाती है, मिर्गी का कारण बन सकती है। 35 वर्ष से अधिक आयु वाले वयस्कों में स्ट्रोक मिर्गी का एक प्रमुख कारण है।
  4. संक्रामक रोग   संक्रामक रोग, जैसे – मेनिन्जाइटिस, एड्स और वायरल इन्सेफेलाइटिस, मिर्गी का कारण बन सकते हैं।
  5. जन्म के पूर्व की चोट – जन्म से पहले बच्चे मस्तिष्क की चोट के प्रति संवेदनशील होते हैं, जो कई कारणों से हो सकती है, जैसे – माँ को होने वाला संक्रमण, अल्प पोषण या ऑक्सीजन की कमी। इस मस्तिष्क की क्षति के कारण मिर्गी या मस्तिष्क पक्षाघात हो सकता है।
  6. विकास संबंधी विकार – मिर्गी कभी-कभी विकास संबंधी विकारों से जुड़ी हो सकती हैं, जैसे कि स्वलीनता और न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस

 

मिर्गी के बचाव के उपाय – Prevention of Epilepsy

सीट बेल्ट्स बांधना और साइकिल चलाते समय हेलमेट पहनना, बच्चों को कार की सीट पर अच्छे से बैठाना और सिर में चोट व अन्य आघातों से बचाव करने वाले उपायों को अपनाकर मिर्गी के कई मामलों में नुकसान को रोका जा सकता है।

पहले या दूसरे दौरे या ज्वर दौरों (Febrile Seizures) के बाद सुझावित दवाएं लेने से कुछ मामलों में मिर्गी को रोकने में मदद मिल सकती है।

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप और संक्रमण के उपचार सहित जन्म से पूर्व की जाने वाली देखभाल द्वारा विकसित हो रहे बच्चे में मस्तिष्क क्षति को रोका जा सकता है, जो बाद में मिर्गी और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकता है।

ह्रदय रोग , उच्च रक्तचाप, संक्रमण और अन्य विकार जो कि प्रौढ़ता और बुढ़ापे में मस्तिष्क को प्रभावित कर सकते हैं, इनका उपचार करके मिर्गी के कई मामलों को रोका जा सकता है। अंत में कई न्यूरोलॉजिकल विकारों के जीन की पहचान करने से जेनेटिक स्क्रीनिंग और जन्म के पूर्व निदान के अवसर मिल सकते हैं, जो अंततः मिर्गी के कई मामलों को रोक सकते हैं।

जीवन शैली में बदलाव करके, जैसे –

  1. अपने तनाव, चिंता या अन्य भावनात्मक मुद्दों के साथ निपटना।
  2. अल्कोहल या नशीली दवाओं का अत्यधिक सेवन या शराब व नशीली दवाओं को छोड़ने की प्रक्रिया।
  3. नींद के कार्यक्रम में परिवर्तन या पर्याप्त एवं अच्छी नींद लेना।

मिर्गी का परीक्षण – Diagnosis of Epilepsy

मिर्गी का परीक्षण/ निदान:

अगर आपको संदेह है कि आपको मिर्गी का दौरा पड़ा है, तो अपने चिकित्सक को जल्द से जल्द दिखाएं। दौरा एक गंभीर चिकित्सा समस्या का लक्षण हो सकता है।

 

आपके मेडिकल इतिहास और लक्षण आपके डॉक्टर को यह तय करने में मदद करेंगे कि कौन से परीक्षण उपयोगी होंगे। आपकी शारीरिक क्षमताओं और मानसिक कार्यप्रणाली का परीक्षण करने के लिए संभव रूप से आपकी न्यूरोलॉजिकल जाँच की जाएगी।

आपके डॉक्टर संभवतः आपकी लाल और सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की गणना करने के लिए रक्त परीक्षण का आदेश देंगे।

1. रक्त परीक्षण द्वारा निम्न बातों का पता लगाया जा सकता है –

  • संक्रामक रोगों के लक्षण
  • लिवर और गुर्दों की कार्य प्रणाली
  • रक्त में शर्करा का स्तर

2. इलेक्ट्रोइन्सेफलोग्राम (ईईजी), मिर्गी का सबसे आम परीक्षण है। इसके तहत सबसे पहले, इलेक्ट्रोड एक पेस्ट के साथ आपकी खोपड़ी से जोड़े जाते हैं। यह एक गैर-आक्रामक, दर्दरहित परीक्षण है। आपको एक विशिष्ट कार्य करने के लिए कहा जा सकता है। कुछ मामलों में यह परीक्षण नींद के दौरान किया जाता है। इलेक्ट्रोड आपके दिमाग की विद्युतीय गतिविधि रिकॉर्ड करेगा। चाहे आपको दौरा आये या न आये, सामान्य मस्तिष्क तरंगों के पैटर्न में होने वाले परिवर्तन मिर्गी में आम हैं।

3. इमेजिंग टेस्ट ट्यूमर और अन्य असामान्यताओं का पता लगा सकते हैं, जिनके कारण दौरे आ सकते हैं। इन परीक्षणों में शामिल हो सकते हैं –

  1. सीटी स्कैन – ये छवियां (Images) सामान्य एक्स-रे छवियों की तुलना में अधिक विस्तृत जानकारी प्रदान करती हैं। सीटी स्कैन के द्वारा शरीर के विभिन्न भागों के नरम ऊतकों, रक्त वाहिकाओं और हड्डियों को देखा जा सकता है।
  2. एमआरआई –  सिर का किया जाने वाला मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) एक पीड़ा रहित, गैर-आक्रामक परीक्षण है, जो आपके मस्तिष्क और मस्तिष्क स्टेम की विस्तृत इमेज दिखाता है।
  3. पॉसिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) – यह एक इमेजिंग टेस्ट है, जिसके द्वारा डॉक्टर आपके शरीर में बीमारियों की जाँच करते हैं।

Additional information

Treatment Days

15 DAYS, 30 DAYS, 60 DAYS

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “मिर्गी के दौरे आना (EPILEPSY)”

Your email address will not be published. Required fields are marked *